तेरी याद

जब भी कभी तेरी याद आती है,

कि जैसे कोई तेज़ रफ़्तार रेलगाड़ी गुज़र जाती हो मेरे चितवन के किसी छोटे, पुराने, बेहाल पड़े प्लेटफॉर्म से होती हुई,

थरथरा उठती हैं मेरे दिल की बेजुबान पटरियां,

कंपकपां उठते हैं मेरे जज़्बातों के बे सूखे पत्ते, जो बेवजह ही बिछ से जाते हैं दिल की उन पटरियों पर अक्सर।
उफ्फ्फ....

रेलगाड़ी गुज़र चुकी है,
प्लेटफॉर्म मौन है,
और पटरियां स्तब्ध,
बस कुछ बेगुनाह सूखे पत्ते ही कुचले जाते हैं हर बार।
हर बार।

जब भी कभी तेरी याद आती है।
-शिवा

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