तेरा तुझमें क्या है?

तेरा तुझमें क्या है?
जन्म दिया तुझे मात-पिता ने
जीवन परमपिता ने
और नाम दिया है बुआ ने
तेरा तुझमें क्या है?

आँखें खोली, देखी ये धरा
अपने होने पे मान करा
प्रकृति,पंछी,सब जीवों से
निज स्वार्थ हेतु इंसान लड़ा
विष घुलित किया धरती नभ को
जैसे काट लिया हो बिछुआ ने
तेरा तुझमें क्या है?

इंसान की हस्ती है छोटी
दे दें तृप्ति, चार रोटी
फिर क्यों भू-पेट चीर देतीं
दोहन करती ये मशीनें मोटी
गर्त की ओर खींच लिया हमें
अंधी हवसों के कुआं ने
तेरा तुझमें क्या है?
     
                        -शिवाजी

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