पसीना छूट जाता है

 वो मुझसे दूर जाती है, दिल कितना टूट जाता है
लहर को ताकता हूँ तो, किनारा रूठ जाता है।
कभी तिनका, कभी ज़र्रा, जुटाता हूँ मोहब्बत का,
वो झटके से आता है, और सब कुछ लूट जाता है।

आज़म था, रूमानी था, खुदाई इश्क़ अपना था,
खनक सिक्कों की कम हो जब, तो रिश्ता टूट जाता है।

वो जब मिलते हैं कहते हैं, जाँ कुर्वान दूँ तुझ पर,
भरोसा चाहता हूँ जब, भरोसा टूट जाता है।

मैं भी झूठा, तू भी झूठी, हुकूमत भी है झूठों की,
कोई सच बोलता है तो, सिपाही कूट जाता है।

जब सोचता है 'शिव', कि अब कुछ बात हो उनसे,
वो जब नज़रें मिलाती हैं, पसीना छूट जाता है।

                                                       -   शिवा

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